Thursday, 13 May 2021

आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़े हर उत्तराखंडी



आज दुनिया उस मुकाम पर है जहाँ जिंदा रहना ही कामयाबी है। इस सर्वव्यापी महामारी के दौर ने मनुष्यों को बता दिया कि हम कितने भी आधुनिक हो जाएं, प्रकृति अपने सन्तुलन हेतु मानव की महत्वकांक्षाओं को कैसे तोड़ के रख देती है। इस महामारी ने मनुष्य को घुटनों पर झुकने के लिए विवश कर दिया। आने वाले समय में यह विवशता फिर न हो इसलिए पहले से ही समझ लेना और उचित कदम उठाना जरूरी है।

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वर्तमान में उत्तराखंड भी इसी प्रलयकारी महामारी से जूझ रहा है। इस महामारी ने लाखों पलायनकर्ताओं को यह संकेत दिया है कि, अपनी जन्मभूमि में ही मनुष्य सुरक्षित रह सकता है। वह अपनी महत्वाकांक्षाओं को सीमित कर एक सुखदायी जीवन जी सकता है। इस समय एक नई सोच नए विचार से हर व्यक्ति अपने जीवन में परिवतर्न ला सकता है। उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों को पहचान कर उनका सुनियोजित उपयोग कर अपने रोजमर्रा के जीवन को अच्छी तरह से तो हम बिता ही सकती हैं, साध ही इन संसाधनों को बढ़ा कर आय के साधन भी पैदा कर सकते हैं। इसलिए अब हम उत्तराखंडियों को अपने आसपास मौजूद संभावनाओं को तलाश कर, आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है।   



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