उत्तराखण्ड टिहरी गढ़वाल में देवप्रयाग विधानसभा के कीर्तिनगर ब्लॉक के धारीदेवी ग्राम में दिनांक 23/05/2021 को सायंकाल 6:00 बजे अतिवृष्टि के चलते बगेढ़ नामक प्राचीन जल स्रोत के पास बादल फटा। जिससे कि पूरे गांव में एक मात्र जल स्रोत भी क्षतिग्रस्त हो गया है। रास्तों में जितनी भी पाइप लाइन बिछी हुई थी सब ध्वस्त हो चुकी है। गाँव के मध्य में सीमेंट की पांच हजार लीटर की टंकी अथवा प्लास्टिक की दस हजार लीटर की टंकी बह गयी है। जल का धारा पूरी तरह से समाप्त हो गया है जिससे ग्रामीणों के लिए आने वाले दिनो में पीने के पानी को लेकर संकट खड़ा होने वाला है। अब प्रशासन को यथाशीघ्र कोई ठोस कदम उठाकर ग्रामीणों की जल व्यवस्था को सुचारू रूप से व्यवस्थित करना चाहिए।
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| क्षतिग्रस्त जल स्रोत |
ग्राम प्रधान धारी श्री सोहन प्रसाद पाण्डेय जी का कहना है कि सायं काल को जब प्रकृति ने रौद्र रूप धारण किया तब इस घटना से किसी भी प्रकार की जान-माल की हानि तो नही हुई है। किन्तु गाँव में जल के स्रोत पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। उन्होने बताया कि घटना के पश्चात् बहुत-सी पार्टियों के नेता एवं कार्यकर्ता आए जिन्होंने मात्र आश्वासन दिया लेकिन जिस प्रकार से उत्तराखण्ड की परिस्थितियाँ हैं उससे तो नहीं लगता कि कुछ ठोस कदम उठाए जाएंगे, इसलिए हमारे संगठन एवं सभी ग्रामीणों को मिलकर ही जल की व्यवस्था को सुचारू रूप से व्यवस्थित करना पड़ेगा।
धारी ग्राम से हमारे “उत्तराखण्ड गढ़कुमाऊँ क्षेत्रीय संगठन” के कार्यकर्ता अनुज भट्ट जी जब बगेढ़ नामक जल स्रोत के पास पहुँचे तो उन्होंने बताया कि हाल ही के वर्षों में वज्रपात यानी आसमानी बिजली गिरने से होने वाली मौतों की तादाद तेजी से बढ़ रही है इसके पीछे का कारण जंगलो की आग, अनियोजित शहरीकरण और वृक्षों की अन्धाधुंध कटाई है।
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| क्षतिग्रस्त स्थान पर स्थानीय युवा |
जिस समय यह घटना हुई उस समय संगठन कार्यकर्ता अंकित जुगराण जी संगठन के अन्य सदस्यों पंकज जी, अजय जी, अतुल जी, ललित जी, युगल जी एवं मनोज जी के साथ गदेरा स्थित दुकान में संगोष्ठी कर रहे थे तभी अचानक से पानी का सैलाब आया और देखते ही देखते पीने के पानी की दोनो टंकियो को बहा ले गया।
अंकित जी का कहना है कि वह दृश्य बहुत ही भयावह था परन्तु बाबा केदार और माँ धारी देवी की कृपा से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
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| मकान के अंदर मलवा |
संगठन के कार्यकर्ता भुवनेश प्रसाद जोशी जी का घर भी इस सैलाब में कुछ हद तक क्षतिग्रस्त हुआ है उनकी दुकान के अन्दर भी पानी घुसा है जिससे दुकान में रखा सामान खराब हो चुका है।
अन्त में यही प्रश्न रह जाता है कि आखिर कब तक उत्तराखण्ड प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलता रहेगा? कब तक हम लोग यूं ही मूकदर्शक बन कर रहेंगे? कब तक राजनेताओं के खोखले वादों से जनता त्रस्त रहेगी? अब समय आगया है कि अपने जंगल, अपनी जमीन, अपना जीवन और अपने उत्तराखण्ड के विकास के लिए हम सभी क्षेत्रवासियों को एकत्रित होकर आगे आना पड़ेगा। अपने क्षेत्र की बागडोर अब हम स्वयं अपने हाथों में लेंगे जिससे कि क्षेत्र का विकास हो।
इस दुख की घड़ी में “उत्तराखण्ड गढ़कुमाऊँ क्षेत्रीय संगठन” धारी ग्राम के साथ खड़ा है और ग्राम प्रधान सोहन प्रसाद पाण्डेय जी को आश्वासन देता है कि तन-मन-धन से जो भी सहायता बन पड़ेगी संगठन के धारी ग्राम स्तर प्रतिनिधि अनुज भट्ट जी के द्वारा मुहैया करवाई जाएगी।
न्यूज
डॉ. नवीन पाण्डेय







बिल्कुल,
ReplyDeleteहम सब एक होकर सारी समस्याओ का हल निकाल सकते हैँ,
ये एक चेतावनी भी हैँ प्रकर्ति की, कि ज्यादा छेड़छाड़ करोगे तो परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैँ!!
संगठन को इस विषय पर सोचने की ज़रूरत है और ठोस कदम उठाने में देरी नही करनी चाहिए
ReplyDeleteविकास और प्रकृति में समन्वय जरूरी है नहीं तो ऐसी प्राकृतिक आपदाएं आती रहेगी।जागरूकता की आवश्यकता है जमीनी स्तर पर।
DeletePrakriti ke sath chhedkhani mat karo
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