स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कदम उठाने से बेहतर होता है स्थिति को गंभीर ही न होने देना। हालांकि हमारे राज्य उत्तराखंड में स्थिति के गंभीर होने से पहले सत्तासीन लोगों के मंसूबों में गंभीरता की कमी रहती है। वर्तमान में जिस हिसाब से राज्य में कोरोना के केस बढ़े हैं उनसे यह बात तो स्पष्ट हो जाती है कि, स्थिति को इतना गंभीर बनाने के पीछे कहीं न कहीं सत्तासीन लोगों की नाकामयाबी भी है।
उत्तराखंड के गांवों में अराजकता का माहौल
हालांकि मुद्दा न केवल करोना के बढ़ते संक्रमण का है, बल्कि इस महामारी को लेकर फैली अराजकता का भी है। इन दिनों माहौल ऐसा है कि कई गांव अफवाहों की चपेट में हैं। सिर्फ यही नहीं जागरूकता की कमी के चलते कई गांवों में मास्क पहनने को इतनी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उस पर सोने पर सुहागा यह कि कुछ लोग कहते सुने जा रहे हैं कि, मदिरा के सेवन से कोरोना नहीं होगा। खबरें यह भी सुनाई दे रही है कि गांव में लोगों ने अपने घर को मदिरालय बना लिया है, और वहां दोगने दाम वसूल कर मदिरा बेची जा रही है। सरकार भले ही यह बात कहती हो कि वह कोरोना के प्रति जागरूकता फैला रही है, लेकिन किस स्तर पर और किस व्यक्ति तक यह जानकारी पहुंच पा रही है, इसको लेकर जवाबदेही किसकी बनती है?
क्या यह सही नहीं होता कि हमारे वर्तमान मुख्यमंत्री या उच्च पदस्थ कोई मंत्री सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक जानकारी मुहैया कराने के लिए सामने आते। कई बार यह महसूस होता है कि हमारे मंत्रियों ने अपने मुंह और नाक के अलावा अपने कान, आंखों पर भी मास्क लगा दिए हैं। हालांकि सारी गलती केवल मंत्रियों पर थोप देना सही नहीं है जनता को स्वयं से भी जागरूक होने की जरूरत है। नहीं तो आखिर में बस इतना कहा जा सकता है हमारे सत्तासीन लोगों की ओर से कि -
‘’अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम दास मलूका कह गए सबके दाता राम’’।

आइए हम सब उत्तराखण्ड गढकुमाऊँ संगठन से जुड़े.....
ReplyDeleteउत्तराखंड का विकास तो जुड़िए उत्तराखंड गढ कुमाऊं क्षेत्रीय संगठन के साथ
ReplyDeleteआइये हम सब मिलकर एक नई सोच के साथ आगे बढ़ें।।
ReplyDeleteइस संगठन से जरूर जुड़े।
उत्तराखण्ड में क्रांति की जरूरत है, सभी पहाड़ियों को संगठित होकर उत्तराखण्ड के हित में कदम बढ़ाना होगा।
ReplyDeleteजय देवभूमि जय पहाड़।👏🌷
aao sabhi sath milkar chle
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