Wednesday, 23 June 2021

सरकार हमारी सुनना नहीं चाहती तो हमें इच्छामृत्यु दे दे- एक उत्तराखण्डी का खुला पत्र

आज मैं आपको उत्तराखण्ड  के जनपद रुद्रप्रयाग के विकाश खण्ड अगस्त्यमुनि के अन्तर्गत पलायन की मार झेल रहे, ग्राम पंचायत कान्डा-सिमतोली के सिमतोली गाँव से अवगत करवाता हूं। हमारे गाँव में लगभग 80% परिवार पलायन कर चुके हैं ओर अब गाँव में गरीब बेबश लोग ही पहाड़ों के इस सुंदर गांव में रह रहे हैं। केवल चार परिवार गाँव में रहते हैं, उनमें भी गिनती के 10 लोग हैं। उन में भी एक दो बुजुर्ग के अलावा बाकी सब महिला ही यहाँ रहते है। सरकार पलायन रोकने के लिये बहुत सारी योजनाएं बना रही है लेकिन हकिकत कुछ ओर ही है, मैं समझता हूं कि वो लोग ही सही करते हैं जो इन पहाड़ों को छोड़ कर जा रहे हैं। क्योंकि जिन गांवो में पलायन हुआ है वहाँ किसी का भी ध्यान नहीं जाता। किसी भी राजनेता, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत के सदस्य या  सरकार के किसी भी अधिकारी या सरकारी विभाग के कर्मचारी का। हर किसी के जुवान में एक ही बात होती की वहाँ तो बहुत कम लोग रहते हैं।




मैं आजतक नहीं समझ पाया कि, क्या जो लोग वहाँ हैं उनको भी वहाँ नहीं रखना चाहते सरकारी कर्मचारी? क्या उन लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जायेगा, वो भी केवल इसलिए कि वहां लोगों की संख्या कम है। क्या संख्या का कम होना किसी गांव के अस्तित्व को खत्म कर देता है? ऐसी स्थिति में किसे दोष दें कौन दोषी है?  वही लोग जो अपनी लाचारी बेबसी गरीबी के कारण अन्यत्र जमीन ले के घर नहीं बना पाते। 

मैं अपने गाँव की बात करुँ तो हमारे यहाँ पर जब कभी पानी टूट जाता है तो 10-10 दिनों तक पानी ही नहीं आता, कभी लाईट खराब हो जाये तो लाईनमेन को हाथ जोड़ते-जोड़ते 10 दिन का टाईम लग जाता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि हमारे गाँव में जब लगभग पूरा गाँव पलायन कर चूका है तब जाके मोटर मार्ग की स्वीकृति हुई, ओर 2 महिने पहले कार्य भी हुआ, लेकिन सड़क बनने से पुराने पैदल मार्ग पूर्णरुप से क्षतिग्रस्त हो गये। खैर मोटर मार्ग की खुशी थी तो ये सब भी कोई बात नहीं लेकिन बरसात शुरु होते ही सड़क पूरी तरह टूट गयी उस पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। अब गाँव वालों के पास अन्य कोई भी रास्ता नजदीकी बाजार जाने के लिये नहीं है। ग्रामीणों ने सबंधित विभाग के ठेकेदार से सम्पर्क भी किया पर बात वही कि वहां के चार लोग हमारा क्या बिगाड़ लेंगे, इस प्रकार की विचार धारा लिये हूए कोई भी व्यक्ति हमारी समस्या कैसे सुनेगा, या हमारी बात सरकार तक कैसे पहुंचेगी। 



आज एक हफ्ता होने को आया है लेकिन रास्ता नहीं बना, 14 जून को लाईट खराब हो गयी थी अभी तक नहीं बनी। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अचानक बीमार हो जाता तो कैसे उसको उपचार के लिये ले जायेंगे पहले ही गाँव की क्या स्थिति है वो मैने आपको बता दी है। 

उत्तराखंड में इस प्रकार के जितने भी गाँव हैं वहाँ के लगभग यही हाल है। क्योंकि सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ऐसे गांवों में वोटर भी नहीं होते इसलिए कोई भी नेता चाहे वो उस ग्राम सभा का प्रधान ही क्यों ना हो ऐसे गांवों पर ध्यान नहीं देता, अब आप ही बतायें कि हम जैसे लोग अपना दुख किसे बतायें।

सरकार से यदि कुछ नहीं होता तो पलायन हो चुके गाँवो में जहाँ असमर्थ लोग ही बहुत कम संख्या में रह रहें हैं उन लोगों को इच्छामृत्यु दे देनी चाहिए। या फिर हर घर तक सुविधा पहुंचाने की बात को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जन-जन तक पहुंचाना चाहिए। हालांकि यह एक सुनहरा ख्वाब लगता है बस। 

कैलाश देवली

5 comments:

  1. वास्तविकता को दर्शाता ये मार्मिक पोस्ट...... 😭😭

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  2. सहियोग करें उन लोगो का जो इस विपत्ती का सामना कर रहे हैं।

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  3. Ek dusre ka sath de aise time pe

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  4. जगाने का प्रयास करें सभी को 🙏🏻

    एक क्रान्ति उठी थी उत्तराखण्ड को बनाने में💪🏻

    अब एक क्रान्ति और चाहिए उत्तराखण्ड को बचाने में। 💪🏻

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