उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है जिसे ख्याति प्राप्त है देवभूमि के नाम से, जो अत्यंत ही नैसर्गिक सुंदरता को स्वयं में समेटे हुए है।यहां की खूबसूरती इसे स्वर्ग बना देती है। किसी भी ऋतु में आप उत्तराखंड आएंगे तो अलग ही अनुभव पाएंगे। परन्तु वर्तमान में इस राज्य में कुछ समस्याएं इस तरह से प्रभावी हो रही हैं जो कि इस किंवदंती को सत्य साबित कर रही है की “पहाड़ की जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आती थी ।
पहाड़ का युवा क्यों पहाड़ में नहीं रुक रहे हैं?
पहाड़ की “जवानी” से अर्थ यहां के युवा वर्ग से है, जो जन्म तो यहां लेता है, यहीं की मिट्टी में खेलकर बड़ा होता है लेकिन जब युवा होता है तो स्वयं को इस प्रदेश में रोककर नहीं रख पाता है। आखिर ऐसा क्यों?
विश्लेषण करने की कोशिश की तो पाया कि यहां के युवा को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें से प्रमुख परेशानियों को आगे उल्लेखित कर रहा हूं
पहला शिक्षा
प्रदेश में काफी जगह या तो स्कूल नहीं है और अगर हैं भी तो बहुत दूर-दूर जहां पहुंचने के लिए बच्चों को मीलों पैदल चलना पड़ता है और जिन कस्बो में स्कूल हैं भी तो वहां पर उत्तम गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध नहीं है।
दूसरा बेरोज़गारी
प्रदेश में रोज़गार उपलब्ध न होना एक प्रमुख कारक है, जिसका यहां के युवा वर्ग को सामना करना पड़ता है और इस कारण युवा वर्ग को रोज़गार की तलाश में महानगरों यथा दिल्ली, मुंबई, पूना आदि स्थानों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। फिर ज़्यादातर युवा इन्हीं महानगरों के बनकर रह जाते हैं और कभी अपने प्रदेश, अपने घर स्थायी तौर पर वापस नहीं लौट पाते।
तीसरा स्वास्थ्य सुविधा
प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधा की दशा अत्यंत ही खराब है। कई जगहों पर या तो अस्पताल नहीं हैं और जहां हैं भी वहां या तो आधुनिक स्वास्थ उपकरण या मशीने हैं ही नहीं और फिर डॉक्टर्स ऐसे दूर-दराज इलाकों में नहीं जाना चाहते क्योंकि उनका शहर की चकाचौंध और शहरो में उनके द्वारा खोले गए क्लीनिक से होने वाली कमाई का मोह नहीं छूट पाता है ।
ना जाने कितने लोगो की मौत सिर्फ इसी वजह से हो जाती है क्योंकि उनके गाँव से अस्पताल इतनी दूर हैं कि मरीज़ के समय रहते अस्पताल तक ना पहुंच पाने के कारण मरीज़ की रास्ते में ही मौत हो जाती है और जो समय रहते पहुंच भी जाते हैं। उनको अच्छी व्यवस्था नहीं मिल पाती हैं ।
चौथा आपदा
उत्तराखंड राज्य अक्सर ही प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलता आ रहता हैं । भूकंप,भू-स्खलन,अतिवृष्टि ,बादलो का फटना इत्यादि यहां की आपदा के कारक हैं, जिससे राज्य को जन-धन की बहुत ज़्यादा क्षति होती है। जिस के कारण भी उत्तराखंड में अच्छे से विकास नही हो पा रह है ।
पांचवा पलायन
उपरोक्त सारे कारण प्रदेश में पलायन जैसी भयावह चिंता को जन्म दे रहे हैं। युवा गाँवों को छोड़कर यहां के शहरों और बेहतर विकल्पों के लिए दूसरे राज्यों के शहरों की और पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं, जिस कारण आज प्रदेश के ज़्यादातर गाँव खाली हो गए हैं या फिर किन्ही-किन्ही गाँवो में आबादी दो से पांच परिवारों तक सिमट कर रह गई है और ये परिवार भी पलायन के लिए तैयार बैठे हैं।
यह पलायन जितना सामाजिक तौर पर बुरा है उससे ज़्यादा बुरा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी हो सकता है क्योंकि इस राज्य की भौगोलिक सीमाएं दूसरे देशों से लगी हुई हैं जिनमे चीन प्रमुख है।
इन सारी समस्याओं से जूझता यह उत्तराखंड राज्य और इसके युवाओं के लिए समस्याएं घटने की बजाय बस बड़ती जा ही रही हैं।
यदि हम सभी युवा जागरुक होंगे तो उत्तराखण्ड को एक सुनहरे भविष्य की और ले जा सकते हैं। आइए हम सब उत्तराखण्ड गढकुमाऊँ क्षेत्रीय संगठन से जुडेंगे और अपने क्षेत्र के विकास में भागीदारी निभाएंगे।
प्रेषक
गौरव जोशी


बहुत सराहनीय सोच आइए हम सभी संगठन जुडें और उत्तराखण्ड के विकास में भागीदारी निभाएं💐🙏🏻
ReplyDeleteउत्तम विचार 🙏 उत्तराखंड गढ़कुमाऊं क्षेत्रीय संगठन ,🙏
ReplyDeleteअत्युत्तम विचार ।।💐💐
ReplyDeleteधन्यवाद आपका।
DeleteBhut dukh hota h apne Uttarakhand ko vikas ke naam pe itna piche h jbki pahadi rajya to हिमांचल प्रदेश bhi h jo ki UK se kitna jada devlop h...hum sab ka pura support h es sangathan ke sath जय देवभूमि उत्तराखंड �� jai baba केदारनाथ❤��❤
ReplyDeleteआपके सहयोग के लिए धन्यवाद।
Deleteआप सब बहुत ही अच्छा कार्य कर रहे है। सभी को आप लोगों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए।
ReplyDeleteधन्यवाद उपेंद्र जी।
ReplyDeleteहम अकेले यह कार्य नही कर सकते हमें इसके लिए एक मजबूत संगठन की आवश्यकता है जिसके लिए उत्तराखण्ड वासियों का सहियोग एवं ग्रामीण क्षेत्रों की क्या समस्या है उनको ध्यान में रखना होगा।
ReplyDeleteuttam kadam sarahaniy karya
ReplyDeleteउत्तराखंड के युवाओं का सहयोग और ग्रामीण क्षेत्रों का सहयोग मिलेगा तो संगठन के कार्यकर्ताओं
ReplyDeleteको कार्य करने का उत्साह बढ़ेगा।
धन्यवाद आरती जी।
ReplyDeleteआपने इस प्रदेश के प्रति जो सराहनीय कार्य के लिए कदम उठाया है हमें उमीद हैं भविष्य में सारे कार्य एक ना एक दिन पूरे होंगे। आप ने यहां पाँच कारण अंकित किये हैं, मैं आपका ध्यान औऱ भी कई छोटी बड़ी समस्या यहाँ जन्म ले रही हैं, जिनमें एक प्रमुख समस्या आजकल जंगली जानवर है जिससे की जो लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए खेती कर रहे, पर कब जंगली जानवर आकर उनकी खेती को बरबाद कर देते है जिससे कि बैरोजगारी बढ़ती ही जा रही है। जिससे की समस्या उत्पन्न हो रही हैं। इस कारण लोग अपने परिवार का पेट भरने के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।
ReplyDeleteमहोदय जी जब भावना नेक कार्य की होगी और उत्तराखण्ड के हर वर्ग से जुडी समस्याएं होंगी तो इसमें सर्वप्रथम यह समस्या भी होगी। आपके बताए मार्ग पर चलेंगे 🙏🏻💐
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ReplyDeleteजी किरन जी 💐🙏🏻
ReplyDeleteजी किरन जी 💐🙏🏻
ReplyDeleteउत्तराखंड के उत्थान एवं विकास की ओर एक सराहनीय कदम आइए हम मिल कर उत्तराखंड को नई पहचान दें 💐🙏🙏
ReplyDeleteउत्तराखंड के युवाओं का सहयोग और ग्रामीण क्षेत्रों का सहयोग मिलेगा तो संगठन के कार्यकर्ताओं
ReplyDeleteको कार्य करने का उत्साह बढ़ेगा।
जगाने का प्रयास करें सभी को 🙏🏻
ReplyDeleteएक क्रान्ति उठी थी उत्तराखण्ड को बनाने में💪🏻
अब एक क्रान्ति और चाहिए उत्तराखण्ड को बचाने में। 💪🏻